भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर मिलने वाली बड़ी सरकारी सब्सिडी की आखिरी तारीख तय हो गई है: 31 मार्च 2028। 4 नवंबर 2026 को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक Bajaj Auto और Tata Motors जैसी कंपनियां अब सब्सिडी के बाद के दौर की तैयारी कर रही हैं। उसी दिन सरकार ने PM E-DRIVE योजना के तहत पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाने की नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है, जिसमें चार्जिंग ढांचे के लिए ₹2,000 करोड़ रखे गए हैं।
भारत में EV खरीदने वालों के लिए 4 नवंबर का दिन दो अहम खबरें लेकर आया है। एक तरफ यह साफ हो गया है कि बड़ी सब्सिडी योजनाओं का सहारा हमेशा नहीं रहेगा। दूसरी तरफ चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाया है। दोनों को एक साथ पढ़ें तो तस्वीर साफ दिखती है: गाड़ी सस्ती करने वाली मदद धीरे-धीरे कम होगी, और चार्जिंग की सुविधा बढ़ाने पर जोर बढ़ेगा।
31 मार्च 2028: सब्सिडी की मियाद क्यों चर्चा में है
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बड़ी EV सब्सिडी योजनाओं की समय-सीमा 31 मार्च 2028 है। इनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) और मांग बढ़ाने वाली PM E-DRIVE योजना शामिल हैं। PLI का कुल बजट ₹25,938 करोड़ बताया गया है, जबकि अक्टूबर 2024 में शुरू हुई PM E-DRIVE का बजट ₹11,900 करोड़ है। इसने पहले की FAME-II योजना की जगह ली थी। EV पर GST की दर 5% है, जो इन योजनाओं से अलग राहत है।
कंपनियों के बयान भी इसी दिशा में हैं। Bajaj Auto के मुख्य वित्तीय अधिकारी दिनेश थापर ने 27 अक्टूबर की कमाई वाली कॉल में कहा था कि कंपनी प्लेटफॉर्म की लागत घटाने पर काम कर रही है, ताकि PLI खत्म होने के असर का बड़ा हिस्सा सोखा जा सके। Tata Motors के प्रबंध निदेशक गिरीश वाघ ने 23 अक्टूबर की कॉल में कहा था कि कंपनी मौजूदा मार्जिन से खुश है, पर सब्सिडी के बाद के दौर के लिए तैयारी जारी है।
आंकड़े बताते हैं कि दांव कितना बड़ा है। Bajaj Auto की EV से कमाई वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में करीब ₹5,500 करोड़ रही, जो घरेलू कमाई का लगभग 34% है। कंपनी का Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर सड़क पर 10 लाख से ज्यादा हो चुका है। देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 10% से ऊपर और इलेक्ट्रिक कारों की 8% से ऊपर पहुंच गई है।
विश्लेषकों की चेतावनी भी यही है। HSBC की सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक अगले चार-पांच साल में EV सब्सिडी कम से कम 50% घट सकती है, और हर कटौती की भरपाई लागत घटाकर या कीमत बढ़ाकर होगी, जिसका बोझ आखिर में ग्राहक पर पड़ेगा। अमेरिका और चीन में मदद घटने के बाद बिक्री गिरी थी।

चार्जिंग के लिए नई गाइडलाइन: क्या-क्या मिलेगा
उसी दिन भारी उद्योग मंत्रालय ने PM E-DRIVE के तहत पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाने की विस्तृत गाइडलाइन जारी की। चार्जिंग ढांचे के लिए ₹2,000 करोड़ रखे गए हैं। प्रस्ताव सरकारी मंत्रालय, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम, राज्य सरकारें और सार्वजनिक उपक्रम दे सकते हैं, चाहे अकेले या चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों के साथ मिलकर। तरजीह दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों, स्मार्ट सिटी, राज्य की राजधानियों और बड़े केंद्रों को जोड़ने वाले हाईवे को दी जाएगी।
चार्जर विद्युत मंत्रालय के 2024-25 के मानकों पर खरे उतरने चाहिए, जिनमें 500 kW तक के CCS-II फास्ट चार्जर और 120 kW या ज्यादा के भारी वाहनों वाले गन शामिल हैं। बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी मदद के दायरे में हैं। मुफ्त सार्वजनिक पहुंच वाली सरकारी जगहों पर ढांचे पर 100% तक मदद मिलेगी, जबकि हवाई अड्डों, मेट्रो स्टेशनों, टोल प्लाजा और तेल कंपनियों के आउटलेट पर ढांचे पर 80% और उपकरण पर 70% मदद दी जाएगी। बेंचमार्क 50 kW चार्जर के लिए ₹6.04 लाख से 150 kW से ऊपर के चार्जर के लिए ₹24 लाख तक है। BHEL लागू करने वाली एजेंसी होगी, और चार्जर मंत्रालय के नेशनल यूनिफाइड हब से जुड़ेंगे।
खरीदार के लिए सीधा हिसाब: चार्जिंग का खर्च
सब्सिडी की खबर से हर खरीदार के मन में एक सवाल आता है: EV चलाना सच में कितना सस्ता पड़ता है। मोटामोटी हिसाब घर की बिजली से लगाया जा सकता है। मान लीजिए घर की बिजली ₹8 प्रति यूनिट है और स्कूटर की बैटरी 3 kWh की है, तो पूरा चार्ज करीब ₹24 में होगा। 40 kWh बैटरी वाली कार का पूरा चार्ज इसी दर पर करीब ₹320 में होगा। यह सिर्फ अनुमान है, आपके शहर की बिजली दर से रकम बदल जाएगी। पब्लिक फास्ट चार्जर पर दर आमतौर पर घर से ज्यादा होती है।
पेट्रोल से तुलना में सिर्फ ईंधन का खर्च न देखें। EV में इंजन ऑयल, क्लच और गियर जैसे खर्च नहीं होते, पर बैटरी बदलने की लागत भी ध्यान में रखें। रोज 40-50 km चलने वालों के लिए घर पर चार्जिंग वाला EV अक्सर सस्ता पड़ता है।
नया TVS iQube जैसे स्कूटरों में लंबी रेंज का दावा अब आम हो गया है, पर कंपनी के दावे और सड़क की असल रेंज में फर्क रहता है। Ultraviolette X-47 Venom जैसी महंगी इलेक्ट्रिक बाइकें दिखाती हैं कि EV अब सिर्फ सस्ते स्कूटरों तक सीमित नहीं है। कारों में Maruti की e-Vitara से जुड़ी खबर बताती है कि भारत EV बनाने का बड़ा केंद्र बन रहा है, जिसका फायदा घरेलू खरीदार को भी मिलेगा।
दिल्ली की नीति: अलग राहत, अलग समय-सीमा
केंद्रीय योजनाओं के अलावा राज्य की नीतियां भी मायने रखती हैं। दिल्ली EV नीति 2026, 1 जुलाई 2026 से 31 मार्च 2030 तक चलेगी। पहले साल में इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ₹10,000 प्रति kWh, अधिकतम ₹30,000 तक की मदद है, पर कीमत ₹2.25 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर सड़क कर और रजिस्ट्रेशन शुल्क से आजीवन छूट है। दिल्ली के खरीदार दिल्ली EV सब्सिडी पोर्टल पर RC मिलने के 30 दिन के अंदर आवेदन कर सकते हैं, और 60 दिन के अंदर सीधे बैंक खाते में रकम आने का लक्ष्य है।
एक नज़र में: क्या बदला, क्या नहीं
- सब्सिडी की मियाद: रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी योजनाएं 31 मार्च 2028 तक हैं; इसके बाद लागत घटाना या कीमत बढ़ाना ही रास्ता होगा।
- चार्जिंग पर जोर: PM E-DRIVE के तहत ₹2,000 करोड़ का चार्जिंग ढांचा, सरकारी जगहों पर 100% तक मदद।
- कंपनियों की तैयारी: Bajaj की EV कमाई ₹5,500 करोड़ के करीब पहुंची है, Tata वाणिज्यिक EV बढ़ा रही है।
- ग्राहक की चाल: मौजूदा इंसेंटिव, डीलर का लिखित ब्योरा और अपने इलाके के चार्जर, तीनों की जांच के बाद ही फैसला लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 31 मार्च 2028 के बाद EV महंगी हो जाएंगी?
जरूरी नहीं, पर खतरा है। HSBC के मुताबिक भरपाई लागत घटाकर या कीमत बढ़ाकर होगी। कंपनियां लागत घटा पाईं तो कीमत स्थिर भी रह सकती है।
PM E-DRIVE की चार्जिंग गाइडलाइन से आम आदमी को क्या फायदा होगा?
ज्यादा चार्जर लगेंगे तो लंबी दूरी की चिंता कम होगी, और एक ही हब से चार्जर खोजना, बुक करना व भुगतान करना आसान होगा।
घर पर EV चार्ज करना कितना पड़ेगा?
बैटरी की क्षमता को बिजली की दर से गुणा करें। 3 kWh स्कूटर बैटरी ₹8 प्रति यूनिट पर करीब ₹24 में फुल होगी। पब्लिक चार्जर पर दर ज्यादा होती है।
EV खरीदने से पहले कौन सी तीन चीजें जरूर जांचें?
मौजूदा इंसेंटिव की लिखित जानकारी डीलर से लें, अपने रोज के रास्ते पर चार्जर देखें, और कंपनी की रेंज को दावा समझकर टेस्ट राइड के बाद ही फैसला करें।
तस्वीरें: Wikimedia Commons से ली गई असली तस्वीरें (CC0/CC BY-SA लाइसेंस)।
